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Showing posts from May, 2020

कबीर जी को मारने का प्रयास किया जाना

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#52_Cruelities_On_GodKabir कबीर परमेश्वर जी को कई बार मारने का प्रयास किया गया ।उनको हाथी से कुचलने की साज़िश की गई,गरम तेल के कड़ाहे में डाला गया,गंगा में डुबोकर मारने का प्रयत्न किया, तोप से मारना चाहा,तलवार से काटना की कोशिश की गई लेकिन कबीर जी तो परमात्मा है अविनाशी हैं उनका बाल भी बांका नहीं हुआ।

संत रामपाल जी के पवित्र कार्य

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संत रामपाल जी महाराज ने सभ्य समाज के निर्माण के लिए बहुत ही उत्तम कार्य किए हैं । संत रामपाल जी द्वारा बताए गए आध्यात्मिक ज्ञान को अपनाकर लोग नशा करना, चोरी, बेईमानी , भ्रष्टाचार, भूण हत्या को खत्म कर रहे हैं। संत रामपाल जी ने समाज में व्याप्त कुरीतियां पाखंडवाद को दूर किया है और लोगों में एक नई चेतना सत्य आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसार किया है। संत रामपाल जी महाराज ने दहेज प्रथा को जड़ से खत्म किया है और उनके अनुयाई विवाह के समय दहेज का लेनदेन नहीं करते हैं। संत रामपाल जी द्वारा बताए गए सत्य आध्यात्मिक ज्ञान से यह संभव हो पाया है। संत रामपाल जी महाराज जी वर्तमान में एकमात्र  असली आध्यात्मिक गुरु है जो पूरे विश्व को मानवता के सूत्र में बांधने का कार्य कर रहे हैं और यह कार्य सफल भी हो रहा है।

भारत का पुनरुत्थान

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भारत का पुनरुत्थान इसका आशय यह है कि भारत को वापस से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक दृष्टि से विकसित करने से है। वर्तमान समय में भारत में स्थिति अच्छी नहीं है, लोगों में सांस्कृतिक हास हो चुका है जिसके कारण  अशांति फैली हुई है और लोग दुखी हैं। कई प्रकार की संस्थाओं, समाज सुधार समिति और एनजीओ के द्वारा भारत के पुनरुत्थान के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी भारत  पहले की तरह विश्वगुरु के रूप में स्थापित नहीं हो पा रहा है और नैतिक पतन की ओर अग्रसर हो रहा है। अगर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना है और मानव समुदाय में नैतिकता ,भाईचारा ,सांस्कृतिक सामाजिक समरसता, एकता सद्भावना आदि गुणों को पूर्ण रूप से विकसित करना है तो हमें असली आध्यात्मिकता की तरफ अग्रसर होना होगा।  वर्तमान में  संत रामपाल जी महाराज शास्त्रों से प्रमाणित सत्य आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा अपने अनुयायियों में यह गुण विकसित कर रहे हैं और अगर उनके ज्ञान को अपनाकर मर्यादा में रहकर सत्य भक्ति की जाए तो भारत का पुनरुत्थान होगा।

असाध्य रोग का कारण तथा पूर्ण समाधान क्या है?

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मानव अपने जीवन में ना चाहते हुए भी कई प्रकार के पाप कर लेता है तथा कई बार जानबूझकर भी कुकर्म कर लेता है तो यह कर्मों की सजा उसे भुगतनी पड़ती है और कई बार तीन ताप के अंतर्गत भी वह दुःख भोगता है। यह दुख उसे असाध्य बीमारी के रूप में भी भोगना पड़ सकता है। असाध्य रोग वह होता है जिसका इलाज चिकित्सक, वैद्य वगैरह नहीं कर पाते हैं। असाध्य रोगों के समाधान के लिए  मनुष्य हर संभव प्रयास करने की कोशिश करता है  लेकिन उसे सफलता नहीं मिल पाती । अब प्रश्न ये उठता है कि इस प्रकार के रोगों का इलाज क्या है?  आइए जानते हैं 👇 जो दुख असाध्य बीमारी के रूप में होता है उसका इलाज हमारे धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है कि पूर्ण परमेश्वर की सत भक्ति असली आध्यात्मिक गुरु के अनुसार बताकर करने पर भयंकर से भयंकर रोग भी ठीक हो जाता है। इन शास्त्रों में यह भी लिखा है कि परमात्मा रोगी का रोग ठीक करके उसे 100 वर्ष की आयु भी प्रदान कर सकता है। अतः असाध्य रोगों का पूर्ण समाधान सत भक्ति ही है।

कुरान शरीफ के अनुसार अल्लाह कौन है?

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मुस्लिम धर्म ग्रंथ के पवित्र शास्त्र कुरान शरीफ में अल्लाह के बारे में बताया गया है कि उस अल्लाह का नाम क्या है जो सबसे ज्यादा समर्थ है। प्रमाण👉 कुरान शरीफ की सूरत फुर्कानी 25 आयत 52 👈में बताया गया है कि कबीर ही अल्लाह है।

कौनसा भगवान असाध्य रोग ठीक कर सकता है?

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पूर्ण परमेश्वर कविर्देव जिन्हें कबीर जी भी कहते हैं वह असाध्य रोगों को भी ठीक कर सकते हैं चाहे किसी भी प्रकार के पाप कर्म हो उन्हें भी काट सकते हैं, परमेश्वर की महिमा वेदों में भी बताई गई है। प्रमाण के लिए यजुर्वेद अध्याय 5 मंत्र 32 को देखने पर पता चलता है कि कबीर परमात्मा पाप विनाशक है।

परमेश्वर कौन है ?

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*अथर्ववेद  काण्ड नं. 4 अनुवाक नं. 1 मंत्र 7* 👇 योऽथर्वाणं पित्तरं देवबन्धुं बृहस्पतिं नमसाव च गच्छात्। त्वं विश्वेषां जनिता यथासः *कविर्देवो* न दभायत् स्वधावान्।।7।। यः-अथर्वाणम्-पित्तरम्-देवबन्धुम्-बृहस्पतिम्-नमसा-अव-च-गच्छात्-त्वम्-विश्वेषाम्-जनिता-यथा-सः- *कविर्देवः* -न-दभायत्-स्वधावान्  *अनुवाद* :- (यः) जो (अथर्वाणम्) अचल अर्थात् अविनाशी (पित्तरम्) जगत पिता (देव बन्धुम्) भक्तों का वास्तविक साथी अर्थात् आत्मा का आधार (बृहस्पतिम्) जगतगुरु (च) तथा (नमसा) विनम्र पुजारी अर्थात् विधिवत् साधक को (अव) सुरक्षा के साथ (गच्छात्) सतलोक गए हुओं को सतलोक ले जाने वाला (विश्वेषाम्) सर्व ब्रह्मण्डों की (जनिता) रचना करने वाला जगदम्बा अर्थात् माता वाले गुणों से भी युक्त (न दभायत्) काल की तरह धोखा न देने वाले (स्वधावान्) स्वभाव अर्थात् गुणों वाला (यथा) ज्यों का त्यों अर्थात् वैसा ही (सः) वह (त्वम्) आप *(कविर्देवः/ कविर्देवः) कविर्देव* है अर्थात् भाषा भिन्न इसे *कबीर परमेश्वर* भी कहते हैं।