परमेश्वर कौन है ?

*अथर्ववेद  काण्ड नं. 4 अनुवाक नं. 1 मंत्र 7* 👇
योऽथर्वाणं पित्तरं देवबन्धुं बृहस्पतिं नमसाव च गच्छात्।
त्वं विश्वेषां जनिता यथासः *कविर्देवो* न दभायत् स्वधावान्।।7।।
यः-अथर्वाणम्-पित्तरम्-देवबन्धुम्-बृहस्पतिम्-नमसा-अव-च-गच्छात्-त्वम्-विश्वेषाम्-जनिता-यथा-सः- *कविर्देवः* -न-दभायत्-स्वधावान्






 *अनुवाद* :- (यः) जो (अथर्वाणम्) अचल अर्थात् अविनाशी (पित्तरम्) जगत पिता (देव बन्धुम्) भक्तों का वास्तविक साथी अर्थात् आत्मा का आधार (बृहस्पतिम्) जगतगुरु (च) तथा (नमसा) विनम्र पुजारी अर्थात् विधिवत् साधक को (अव) सुरक्षा के साथ (गच्छात्) सतलोक गए हुओं को सतलोक ले जाने वाला (विश्वेषाम्) सर्व ब्रह्मण्डों की (जनिता) रचना करने वाला जगदम्बा अर्थात् माता वाले गुणों से भी युक्त (न दभायत्) काल की तरह धोखा न देने वाले (स्वधावान्) स्वभाव अर्थात् गुणों वाला (यथा) ज्यों का त्यों अर्थात् वैसा ही (सः) वह (त्वम्) आप *(कविर्देवः/ कविर्देवः) कविर्देव* है अर्थात् भाषा भिन्न इसे *कबीर परमेश्वर* भी कहते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

असली ब्राह्मण कौन?

कबीर जी को मारने का प्रयास किया जाना

कबीर साहेब जी प्रकट होते हैं?