भारत का पुनरुत्थान
भारत का पुनरुत्थान
इसका आशय यह है कि भारत को वापस से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक दृष्टि से विकसित करने से है। वर्तमान समय में भारत में स्थिति अच्छी नहीं है, लोगों में सांस्कृतिक हास हो चुका है जिसके कारण अशांति फैली हुई है और लोग दुखी हैं।
कई प्रकार की संस्थाओं, समाज सुधार समिति और एनजीओ के द्वारा भारत के पुनरुत्थान के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी भारत पहले की तरह विश्वगुरु के रूप में स्थापित नहीं हो पा रहा है और नैतिक पतन की ओर अग्रसर हो रहा है।
अगर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना है और मानव समुदाय में नैतिकता ,भाईचारा ,सांस्कृतिक सामाजिक समरसता, एकता सद्भावना आदि गुणों को पूर्ण रूप से विकसित करना है तो हमें असली आध्यात्मिकता की तरफ अग्रसर होना होगा।
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज शास्त्रों से प्रमाणित सत्य आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा अपने अनुयायियों में यह गुण विकसित कर रहे हैं और अगर उनके ज्ञान को अपनाकर मर्यादा में रहकर सत्य भक्ति की जाए तो भारत का पुनरुत्थान होगा।
इसका आशय यह है कि भारत को वापस से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक दृष्टि से विकसित करने से है। वर्तमान समय में भारत में स्थिति अच्छी नहीं है, लोगों में सांस्कृतिक हास हो चुका है जिसके कारण अशांति फैली हुई है और लोग दुखी हैं।
कई प्रकार की संस्थाओं, समाज सुधार समिति और एनजीओ के द्वारा भारत के पुनरुत्थान के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी भारत पहले की तरह विश्वगुरु के रूप में स्थापित नहीं हो पा रहा है और नैतिक पतन की ओर अग्रसर हो रहा है।
अगर भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना है और मानव समुदाय में नैतिकता ,भाईचारा ,सांस्कृतिक सामाजिक समरसता, एकता सद्भावना आदि गुणों को पूर्ण रूप से विकसित करना है तो हमें असली आध्यात्मिकता की तरफ अग्रसर होना होगा।
वर्तमान में संत रामपाल जी महाराज शास्त्रों से प्रमाणित सत्य आध्यात्मिक ज्ञान के द्वारा अपने अनुयायियों में यह गुण विकसित कर रहे हैं और अगर उनके ज्ञान को अपनाकर मर्यादा में रहकर सत्य भक्ति की जाए तो भारत का पुनरुत्थान होगा।


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